२५ मिनुत तक उन्हें छोड़ा

बात की शुरुआत करने से पहले मैं कुछ अपने बारे में बताना चाहता हूँ॥ में होमोपेथिक डॉ। हूँ… लगभग ४ महीने पहले की बात है एक आंटी( मेरे क्लिनिक में आयीं और अपनी कोम्प्लैंत सुनाने लगीं,तरह की कोम्प्लैंत सुनने के बाद मैंने उन्हें दवाई दी और एक हफ्ते बाद आने को कहा और मेरा मोबाइल नो. उन्हें दे दिया..दुसरे ही दिन उनका फ़ोन आया की दवाई लेने से उनकी प्रॉब्लम और बढ़ गयी है,और एक अजीब प्रॉब्लम हो रही है की उन्हें सेक्स की इच्छा बहुत होने लगी है मैंने अगले दिन उन्हें क्लिनिक में बुलाया कुछ उनके घर के और फॅमिली के बारे में पूछा तो पता चला की वो अपनी छोटी बेटी के साथ रहती हैं और १ साल पहले ही उनके हुसबंद की देअथ हुयी है..

उसके बाद से उन्हें घबराहट,बेचैनी,डर,वहम,नींद न आने और बात बात में अपने हुसबंद की याद में रोने लगने की इच्छा होती है…आगे और हिस्टरी लेने पर पता चला की उनकी सेक्सुअल लाइफ भी बहुत अच्छी थी और हुसबंद की देअथ के बाद अकेलापन महसूस करने लगी थी..मैंने फीर से उन्हें कुछ दवैयाँ दी और वो कुव्ह्ह उदासी सा चेहरा लीये मेरे क्लिनिक से चली गयी,और मैं अपने मरीजों को देखने में व्यस्त हो गया…..

३ दिन बाद दोपहर के एक बजे रोटी हुयी आवाज़ में उनका फ़ोन आया और कहने लगीं की उनकी तकलीफ अचानक बढ़ गयी है और वो इस लायक भी नहीं के वो मुझे दिखने आ सकेएं..तो उन्होंने मुझे घर आके चेक-उप करने को कहा.मैंने भी उनकी रोई आवाज़ को सुन आने के लीये हाँ कह दिया,क्युंकी उनका घर मेरे ही शहर में था और कोई जादा दूर भी नहीं..मैं उनके घर पहुंचा बेल बजाई मैड ने दरवाज़ा खोली मैं अंदर चला गया अतिएन्त के बारे में पूछा तो पता चला की वो अपने बेडरूम में हैं,कहकर मैड ने मुझे बेडरूम की और इशारा किया और खुद घर से चली गयी.

अब इस घर में मैं और मेरा अतिएन्त थे..मुझे बेडरूम में घुसते देख उन्होंने जोर जोर से रोना शुरू कर दिया,मैंने हाल चाल पूछ तो उन्होंने रोते हुए अपनी कमर की और इशारा किया की इसमें बहुत दर्द है..मैंने जैसव ही कमर चेक करने अपना हाथ बढाया तो उनकी सिसकी बढ़ने लगी और वो लम्बी सासे लेने लगी और कहा की सीने में अजीब एथान और दर्द हो रहा है,मैंने जैसे ही अपना स्टेथो उनके सीने में रखा वो प्यासी नागिन की तरह अपनी ज़बान चाटने लगी और मेरा हाथ पकड़ कर बोली के तुम्हे डॉ किसने बना दिया जो मरीज़ की बीमारी नहीं पहचान सकते..मैंने उनका बप चेक करने की कोशिश की तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ अपनी और खीच कर कहा की डॉ साहेब बप नहीं बल्कि अपनी छूट की तरफ इशारा कर कहा की यहाँ का प्रेस्सुरे चेक करो.तब मैं समझा की मेरे इस मरीज़ को कौन से बीमारी है..

फीर मैंने कहा की कोई बात नहीं अब उन्हें घबराने की ज़रुरत नहीं और मैं उनकी पीठ सहलाने लगा वो गरम होने लगीं और अपनी बूब्स को मेरी और करने लगीं मैंने भी उनके बूब्स देखे और उसे मसलने लगा उनकी सिसकी बढ़ने लगी मैंने अपने हाथों को ब्लौसे के अंदर किया और उन्होंने ब्लौसे और ब्रा दोनों खोल अपनों सदी उतार दी अब वो सिर्फ अपनी चड्डी में थी मैंने भी अपने कपडे उतारे और उनके ऊपर चढ़ गया थोड़ी देर बूब्स को दबा इसे चूसा और फीर अपनी मंजिल यानि छूट की और देकः वाकई में क्या छूट थी जैसे विरगिन की मैंने उसकी लिच्किंग सुरु कर दी और आंटी की बेचैनी बढ़ने लगी और फीर मैंने वो काम शुरू किया जिसका वो इंतज़ार कर रहीं थी,मैंने अपने ९इन्च लैंड को उनकी गीली छूट में डाला जो थोड़ी सी हरकत के बाद सीधे अंदर गुसा जिससे अतिएन्त चीख से आआआआअह्ह्ह्ह्ह्ह् निकला मैंने लगभग २५ मिनुत तक उन्हें छोड़ा वो पूरी तरह से संतुष्ट हुयीं और फीर मैं वहां से चल निकला….और जब कभी भी उनका फ़ोन आता है या मेरी इच्छा होती है तो हम भरपूर चुदाई करते

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