Hindi Sex Stories in hindi font माँ को सिर्फ लंड से मतलब था

Hindi Sex Stories in hindi font माँ को सिर्फ लंड से मतलब था

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम विक्रम है और आज best Hindi Sex Stories in hindi font top indian hindi chudai kahani 2016 Indian Sex Chudai में एक बार फिर से आप सभी लोगों के लिए अपनी एक और सच्ची कहानी लेकर आया हूँ जिसमे एक बार फिर से मेरी चुदक्कड़ माँ मेरे एक दोस्त से चुदी और उसके साथ बहुत मज़े किए. अब में वो सब कुछ थोड़ा विस्तार से आप सभी लोगो को बता देता हूँ. दोस्तों यह कहानी मेरी माँ और मेरे एक दोस्त की है. मेरा दोस्त मुझसे मिला और फिर वो मेरे मुलाकात करवाने पर मेरी माँ से भी मिला और फिर उसने मेरी माँ से बहुत ही कम समय में दोस्ती कर ली, में अब अपने दोस्त के बारे में भी बता देता हूँ. उसका नाम आशीष है वो दिल्ली से है और उसकी हाईट 5.11 गोरा रंग, दिखने में अच्छा शरीर और लंड का साईज़ 6.5 है. दोस्तों मेरी माँ का नाम सपना है और हम एक मध्यम वर्ग परिवार से है और में फरीदाबाद में रहता हूँ. मेरे घर पर में मेरी मम्मी, पापा है. मेरे पापा का अपना काम है इसलिए में कभी काम पर पापा के साथ तो कभी मस्ती, बस यही मेरा काम है.

में अपने दोस्त आशीष से मिला और हम अच्छे दोस्त बन गये. वो मुझसे एक बार मिला भी फिर एक दिन में उसे अपने साथ घर लेकर आ गया. आशीष को मेरी माँ को बुरी तरह से चोदना था, वो चाहता था कि उसकी चूत को फाड़ दे. फिर मैंने उसे अपनी माँ से मिलवाया और उनसे कहा कि यह मेरा दोस्त है आशीष है, उनके बीच हाय हैल्लो हुई और माँ ने हमारे लिए चाय बनाई और हम सभी ने चाय पी. और फिर कुछ देर बाद में माँ और आशीष से यह बात बोलकर वहां से उठकर बाहर चला गया कि में अभी आता हूँ, मुझे एक कॉल करना है और अब में बाहर आ गया.

आशीष और मेरी माँ अब अंदर ही बैठे हुए इधर उधर की बातें कर रहे थे और थोड़ी देर बाद में भी अंदर चला गया उसके बाद हम दोनों मेरे घर से बाहर निकल गये मैंने बाहर आने के बाद आशीष से पूछा कि तुम्हारी क्या क्या बात हुई? तो आशीष बोला कि कुछ नहीं, बस ऐसे ही उन्होंने मुझसे पूछा कि तुम क्या करते हो कहाँ के रहने वाले हो यह सब? दोस्तों उसके बाद आशीष कभी भी मेरे साथ मेरे घर पर आ जाता था.

दोस्तों 6 जून को मेरी माँ का जन्मदिन था तो मैंने इस बात को आशीष को भी बता दिया था कि माँ का जन्मदिन है और उस समय मेरे पापा भी कुछ दिनों के लिए मेरे घर से बाहर गये हुए थे और फिर मैंने आशीष को बता दिया कि यह तेरे लिए एकदम सही टाइम है उसने मेरी बात को एक बार कहते ही तुरंत मान लिया और अब तक मेरी माँ और आशीष की बहुत अच्छी बनने लगी थी. 6 जून को आशीष मेरे घर पर आ गया. दोस्तों उस समय मेरे घर पर कोई भी नहीं था और में भी अपनी माँ से झूठा बहाना बनाकर बाहर चला गया था. फिर आशीष ने दरवाजे पर लगी घंटी को बजा दिया तो माँ ने दरवाजा खोलकर कहा अरे आशीष बेटा कैसे हो तुम?

आशीष : हाँ में एकदम ठीक हूँ आंटी और आप कैसे हो? आपको अपना जन्मदिन मुबारक हो आंटी.

माँ : धन्यवाद बेटा, लेकिन आपको कैसे पता चला कि मेरा आज जन्मदिन है और इस समय तो विक्रम भी घर पर नहीं ही है.

आशीष : आंटी आप यह सब मुझे अंदर बुलाकर भी पूछ सहकते हो.

माँ : अरे मुझे माफ़ करना बेटा, आ जाओ अंदर.

अब आशीष अंदर आ गया और फिर उसने बताया कि विक्रम ने कुछ दिन पहले ही बातों ही बातों में उसे बता दिया था कि 6 जून को आपका जन्मदिन है. तो माँ ने बोला कि उसे तो याद भी है, लेकिन उसके पापा ने तो आपको बधाई भी नहीं दी और ना मुझे एक बार भी फोन किया. दोस्तों आशीष के हाथ में एक केक और गिफ्ट भी था और उसने वह माँ को दे दिया और बोला कि आंटी केक कट करो. उसके बाद आप अपना यह गिफ्ट खोलकर देखना. दोस्तों आशीष के मुहं से यह सभी शब्द सुनकर मेरा माँ थोड़ी सी उदास हो गयी और उनकी आँख में हल्के से आंसू आ गये और वो कहने लगी कि बेटा आज तक मेरा जन्मदिन कभी किसी ने नहीं मनाया.

दोस्तों यह सब बातें मैंने ही आशीष को बताई थी तो उसने बोला कि कोई बात नहीं आंटी आप आज मना लो, में हूँ ना आपके साथ, आपको खुश करने के लिए. अब माँ ना तुरंत आशीष को हग कर लिया और फिर आशीष और माँ ने वो केक काट लिया और आशीष को खिला दिया और आशीष ने माँ को खिला दिया. अब आशीष ने बचा हुआ पूरा केक मेरी माँ के चेहरे पर लगा दिया और माँ भी आशीष को लगाने लगी और ऐसे करते करते उन दोनों ने एक दूसरे को बहुत सारा केक लगा दिया, जिसकी वजह से उन दोनों के कपड़े, चेहरा, बाल सब जगह केक लग गया.

फिर आशीष ने मेरी मम्मी को अपना वो गिफ्ट दिया और उसमे एक सुंदर सी ड्रेस थी. माँ ने उसे खोलकर देखा और वो बोली कि वाह यह तो बहुत अच्छी है. तो आशीष ने कहा कि तो आंटी अब आप इसे एक बार पहनकर भी देखो ना, माँ बोली कि क्या अभी? आशीष ने बोला कि हाँ आंटी यह कपड़े तो आपके सारे केक में खराब हो गये है तो नहाना तो अब आपको पड़ेगा, नहाकर चेंज कर लो.

अब मेरी माँ ने ठीक है कह दिया और दोस्तों आप सभी लोग मेरी माँ को तो बहुत अच्छी तरह से जानते ही हो कि वो कैसी है? उसे तो बस कोई अच्छा मौका चाहिए, माँ तुरंत बोली कि ठीक है में अभी आती हूँ, तुम तब तक बैठो. अब आशीष लिविंग रूम में बैठा हुआ था और उसे जब लगा कि माँ अंदर बाथरूम में चली गयी है तो उसने सोचा कि अब माँ के रूम में जाकर बैठ जाता हूँ और वो रूम में चला गया और माँ के बाथरुम के पास चला गया और मेरी माँ ने ऐसे ही दरवाजा बंद तो कर दिया, लेकिन पूरा बंद नहीं किया आशीष ने ऐसे ही हल्का सा चेक करने के लिए अपना एक हाथ लगाया तो वो खुल गया उसने देखा कि मेरी माँ ब्रा और पेंटी में नहा रही थी आशीष ने तुरंत दरवाजा पूरा खोल दिया और उसके अपने सारे कपड़े बाहर ही उतारकर वो खुद भी बाथरूम के अंदर चला आ गया. तो माँ उसे अचानक से देखकर बिल्कुल चकित हो गई या फिर होने का नाटक करने लगी और वो बोली कि अरे बेटा आप यहाँ पर कैसे? में नहा रही हूँ.

आशीष बोला कि अरे आंटी वो मुझे भी केक लगा है तो इसलिए मैंने सोचा कि आपके साथ में भी नहा लेता हूँ, प्लीज आप थोड़ा मुझे भी साफ कर दो ना. दोस्तों मेरी माँ को तो ऐसा ही मौका चाहिए होता है माँ ने झट से कहा कि अच्छा लाओ में कर देती हूँ और अब माँ उसके साथ नहाने लगी और उसके शरीर पर हाथ लगाने लगी और अब हाथ लगते लगते आशीष का लंड तनकर खड़ा हो गया. उस पर माँ की नज़र चली गई और माँ ने अपना एक हाथ उसके लंड के पास लाकर उससे पूछा कि तुमने अंदर यह क्या छुपा रखा है, यह क्या मेरे लिए कोई और गिफ्ट है? तो आशीष बोला कि हाँ आंटी यह आपके लिए सबसे अच्छा गिफ्ट है, अब माँ ने मुस्कुराते हुए कहा कि अच्छा तो मुझे यह गिफ्ट भी दो ना.

फिर आशीष ने झट से अपना अंडरवियर उतार दिया और माँ उसके लंड को देखकर बहुत खुश हो गयी और उसका लंड करीब 6.5 इंच का था. अब माँ ने उसे हाथ में ले लिया और हिलाने लगी. आशीष ने भी माँ की ब्रा पेंटी को उतार दिया और अब वो भी मेरी माँ की चूत पर हाथ लगने लगा जिसकी वजह से माँ उम्म्म उफ्फ्फ्फ़ कर रही थी. अब आशीष ने माँ को किस करना शुरू कर दिया और फिर माँ के बूब्स को दबाने लगा और चूसने लगा. फिर थोड़ी देर में वो दोनों नहाकर बाथरूम से बाहर आ गये, लेकिन वो दोनों पूरे नंगे ही बाहर आ गए तो आशीष ने बोला कि आंटी यह आपका शरीर बिना कुछ पहने बहुत अच्छा लगता है और उसने माँ को बेड पर लेटा दिया और वो उनके ऊपर आ गया. वह माँ को किस करने लगा और माँ के बूब्स को चूसने लगा, वो दोनों बिल्कुल मदहोश हो गये.

अब आशीष ने मौका देखकर माँ की चूत में अपनी जीभ को डालकर वो चूत के दाने को चूसने लगा जिसकी वजह से माँ मचल गई और कुछ देर चूसने के बाद आशीष ने अपना लंड माँ के मुहं की तरफ कर दिया और अब माँ भी उसका लंड अपने मुहं में लेकर चूसने लगी और कुछ देर चूसने चाटने के बाद वो दोनों अपनी चरम सीमा तक पहुंच गये थे और फिर वो दोनों एक दूसरे के मुहं में झड़ गए और एक दूसरे का रस चाटकर चूसकर वो दोनों कुछ देर बाद बिल्कुल सीधा होकर लेट गए.

तभी थोड़ी देर बाद आशीष ने माँ का एक हाथ अपने लंड पर रख दिया और माँ उसे मसलने लगी और फिर आशीष ने दोबारा जब उसका लंड खड़ा हुआ तो उसने अपना लंड माँ के मुहं में डाल दिया और माँ लंड को चूसने लगी. अब तक उसके लंड का आकार बहुत बड़ चुका था. फिर आशीष ने अपनी पेंट से एक कंडोम बाहर निकाला और माँ को उसे अपने लंड पर लगाने को कह दिया और माँ ने उसके लंड पर उस कंडोम को तुरंत लगा दिया. अब आशीष अपने लंड को माँ की चूत पर लगाकर धीरे धीरे रगड़ने लगा और कुछ देर बाद माँ गरम होकर बोलने लगी कि प्लीज अब इसे मेरी प्यासी चूत के अंदर डाल दो प्लीज आशीष. फिर आशीष ने एक ज़ोर का झटका दे दिया और लंड माँ की चूत में चला गया और माँ ज़ोर से चिल्ला गई, क्योंकि पूरा लंड एकदम से गया था तो माँ बोली कि थोड़ा आराम से आईईईई क्या आज तू मुझे मारेगा क्या?

अब आशीष बोला कि आंटी आज ज़ोर ज़ोर से ही करने में मज़ा आएगा और आज आपको गिफ्ट देना है और वो स्पीड में करने लगा. फिर माँ बोली उफ्फ्फफ्फ्फ़ आह्ह्हह्ह प्लीज आशीष थोड़ा आराम आराम से कर बेटा, आराम से ऊईईईईइ माँ मर गई. अब आशीष कहने लगा कि चुपकर साली बस मज़े ले और फिर उसके अपनी स्पीड को और भी बड़ा दिया. फिर कुछ देर में करीब 12- 20 मिनट के बाद आशीष झड़ गया और वो माँ के ऊपर ही थककर लेट गया. दोस्तों उसने मेरी माँ को कपड़े पहनाकर फिर से उतारकर दोबारा चोदा और उसकी गांड भी मारी. उस दिन पूरे दिन उसने मेरी माँ को बहुत मज़े लेकर चोदा.